भाजपा और पीडीपी दोनों अपनी गलतियों में फंसे हैं और फिर पांव पर कुल्हाड़ी
मार रहे हैं। हां, तब भी कुल्हाड़ी मारी थी जब श्रीनगर में साझा सरकार की
शपथ हुई थी। तब तीन महीने मुफ्ती मोहम्मद सईद सोच-विचार करते रहे। भाजपा ने
भी कम नहीं सोचा था। बावजूद इसके दोनों ने गलती की। तभी आज दोनों नए सिरे
से सौदेबाजी को मजबूर हैं। भाजपा शेर बनना चाह रही है तो मेहबूबा मुफ्ती
भाजपा को हैसियत दिखा रही हैं। इस खेल में मेहबूबा मुफ्ती के लिए गंवाने को
कुछ नहीं है जबकि भाजपा को गंवाना ही गंवाना है। भाजपा न इधर की रहेगी और न
उधर की। यहां क्लिक करे..http://goo.gl/R4Lu8x

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